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Thursday, 4 May 2017

अमरीकी विश्वविद्यालय ने "डो (Dow)" पर प्रदूषण का मुकदमा किया !!

तीन खतरनाक  रसायन  परिसर में भूजल (underground water)  के साथ मिल गए है , जिससे परिसर का भूजल प्रदूषित हो गया है , और इसलिए स्कूल चाहता हे की  "डो(Dow)"  इसकी सफाई के लिए भुगतान करे।


 







                                                                                           अमेरिका में "वेस्ट वर्जिनिया स्टेट यूनिवर्सिटी (WVSU)" , तीन खतरनाक रसायनो के साथ अपने कैंपस  निचे  भूजल को दूषित करने के लिए "डॉ (Dow) केमिकल(chemical)"  के खिलाफ मुकदमा कर रहा है। यूनिवर्सिटी बाहरी विशेषज्ञों और "अमरीकी पर्यावरण संरक्षण एजेंसी (EPA)" द्वारा इस  समझोते को स्वीकार किया हे की यह प्रदूषित पानी मानव स्वस्थ पर कोई असर नहीं करता क्योकि , "वेस्ट वर्जिनिया स्टेट यूनिवर्सिटी (WVSU)" नगरपालिका के पानी का इस्तेमाल  करता है , भूजल  का  नहीं। हालाँकि , "वेस्ट वर्जिनिया स्टेट यूनिवर्सिटी (WVSU)"  का कहना है की यह भूजल प्रदुषण उनके परिसर पर भविष्य में किये जाने वाले निर्माण कार्य को सिमित कर देगा  और  वे चाहते है की "डॉ (Dow)" आवश्यक सफाई के लिए भुगतान करे। 


                                                                                            यह पानी 36 डिग्री सेल्सियस तक के स्तर  पर 1,4 डाइऑक्सीजन के साथ प्रदूषित है ,  "अमरीकी पर्यावरण संरक्षण एजेंसी (EPA)"के रिजिनल स्क्रीनिंग लेवल (RSL) - जीवन भर में  मनुष्यो के लिए सुरक्षात्मक मन जाता है - यह 0.46 ppb (पार्ट  पर बिलियन) है। इस बिच , 12.3 ppb (पार्ट  पर बिलियन) पर 1,1-डिक्लोरोएथेन का पता चला है  जो की 2.8 ppb (पार्ट  पर बिलियन) के रिजिनल स्क्रीनिंग लेवल (RSL) की तुलना में चार गुना अधिक  है, और क्लोरोफॉर्म  को 29.9 ppb (पार्ट  पर बिलियन)  के बराबर पाया गया है जबकि इसकी रिजिनल स्क्रीनिंग लेवल (RSL)  0. 22 ppb (पार्ट  पर बिलियन) है। 



                                                                                                  "डॉ (Dow)"  ने सरकारी नियामकों (regulators) को स्वीकार किया है , की  "वेस्ट वर्जिनिया स्टेट यूनिवर्सिटी (WVSU)"  के पास में  दूषित 
पदार्थो का स्त्रोत है। हालाँकि बायर(bayer) और सनोफी(sanofi) समेत आसपास के प्लान्ट(plants) में काम करने वाली  कंपनीओ का नाम भी  "वेस्ट वर्जिनिया स्टेट यूनिवर्सिटी (WVSU)" के मुकदमे  में रखा गया है। 
एंथोनी जेंकिन्स (anthony jenkins)

                                                                                               और यह मुकदमा संपत्ति के नुकसान के बारे में है , किसी भी तत्त्काल स्वास्थ्य सम्बंधित चिंता का विषय नहीं है , "वेस्ट वर्जिनिया स्टेट यूनिवर्सिटी (WVSU) के अध्यक्ष , एंथोनी जेंकिन्स (anthony jenkins) , ने कर्मचारीओ ओर छात्रो को एक पत्र में बताया की " भविष्य में  ऐसी  कोई  असुरक्षितता(exposure)  नहीं होगी और  "डॉ (Dow)" को उनकी यूनिवर्सिटी की प्रदूषित जगह को पुनर्स्थापित करना होगा और सुरक्षात्मक उपायों के लिए भुगतान करना होगा और दूषित स्तरों की निगरानी के लिए पैसा देना होगा। "                                                                             
                                                                                                



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Friday, 10 March 2017

अब पेड़ मैसे बिजली पैदा होगी !!!

अब जल्दही पेड़ो पर पत्तों , टहनियो ,फलों और फूलो की तरह बिजली भी उत्पन होती नज़र  आयेगी। वैज्ञानिकों ने एक ऐसा पेड़ विकसित किया है , जो बिजली पैदा करेगा। जब हवा इस पेड़ के कुत्रिम पत्तो से होकर गुजरेगी , तो बिजली पैदा होगी। 


                        

                                                                    
               
                                                                  यह तकनीक अमरीका स्थित ईयवा यूनिवर्सिटी में शंशोधनकर्ता ने विकसित की है। इससे लोगोको घरेलू इस्तमाल में आने वाले उपकरणों को चार्ज करने में मदद मिल सकती है ,विज्ञानिको ने एक ऐसा उपकरण विकसित किया है जो पेड़ पर शाखा और पत्तो की तरह लग जाता है। फिर जब हवा इसके कुत्रिम पत्तो से होकर गुजरती है , तो इसमें बिजली पैदा होती है। 

 माइकल मैकक्लोस्की का तैयार किया हुआ उपकरण 

                                                                                    

                                                                                     इस उपकरण को डिजाइन करने वाले माइकल मैकक्लोस्की ने  कहा की इसमें हवा से  घुमने वाली टरबाइन को नही बदल गायेगा , बल्कि यह तकनीक इस तरह की छोटी मशीनों का का बाजार तैयार करेगी जो की हवा को बिजली में बदल सकेंगे। उन्होंने  कहा,. "इस तकनीक का सकारात्मक पहलू है की यह देखनेमें भी सुन्दर लगता है और काफी छोटे स्तर पर भी काम करता है। इसकी मदद से ऑफ-ग्रिड बिजली पैदा की जा सकेगी। "

माइकल मैकक्लोस्की


                                                                                     माइकलने कहा  की "पेड़ की तरह दिखने वाले इस उपकरण की मदद से आपको जरूरत के मुताबिक बिजली मिलसकती है की नही , इस सवाल का जवाब देते हुए में कहूंगा की -यह सम्भव है ,लेकिन इसमे और भी सुधार किये जाने है  इसे और भी विकसित किये जाने की जरूरत है। " 

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                                                                                      माइकल ने बताया की कुछ शहरी इलाको में लगे मोबाइल फ़ोन टावर की सुंदरता बढ़ाने के लिए उनपर पत्ते वगैरह लगाकर पेड़ की शक्ल देने का प्रयोग चल रहा है। 

                                                                                      यह सिर्फ शहर की सुंदरता बढ़ाने के लिये किया गया एक उपयोग है। अगर इन्ही पत्तो में  उनकी टीम के ध्वारा बनाया गया उपकरण जोड़ दिया जाए , तो इससे बिजली  उत्पादन का अतिरिक्त फायदा भी उठाया जा सकता है। 


                                                                                           
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Wednesday, 8 March 2017

नासा ने अवकाश मे बढ़ सकने वाले पौधों को विकसित किया !

अवकाश में संशोधन करने वाली प्रयोगशाला  " इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन " (international  space station) पर , उनकी संस्था नासा इस नए पौधे को भेजेगे । इस पौधे का विकास और वृद्धि स्वावलंबी होगी और उससे  वहाँ के विज्ञानी अपनी खोराक की  आवश्यकताओं को संतुस्ट कर पायेंगे। 

नासा ने अवकाश मे बढ़ सकने वाले पौधों को विकसित किया है उसको इमेज में देखा जा सकता है। 

                                                     
                                                                              नासा ने विकसित की हुई यह वनस्पति अब  ISS  (international  space station) पर पहले ही विकसित वनस्पति वेजी के साथ जुड़ जायेगी। यह छोड़ अवकाश केंद्र पे विकसित होने के  लिये तैयार किया  गया हे। और सिर्फ इतना   ही नही उसके ऊपर  135 दिन सफल परीक्षण के बाद उसको भेजने का निर्णय लिया गया है। और वो सम्पूर्ण  स्वावलम्बी है , एक बार खाद और पानी देकर पौधे को  बोया जाता है ,बाद में उसे किसीभी प्रकार की देखभाल की जरूरत नही रहती है और उसकी वृद्धि होती रहती है। 

NASA 


                                                         और तो और उसका आहार  भी बहुत सरलता से शक्तिदायक औषध के तौर पे उपयोग में लिया जाता है। वैसा बयान  नासा के अवकाश संशोधक ब्रायन ओनेटे ने दिया था। 

 ISS  (international  space station) पर  विकसित वनस्पति को इमेज में देखा जा सकता है। 


                                                                यह वनस्पतिकी प्रथम ऐसी आवृति हे की जो, दूर अवकाश में वुद्धि करेंगी और खोराक में उपयोग में ली जा सकेगी। गोबी और  राय के बिच के वर्ग की यह वनस्पति में दोनों के गुणधर्म है। जिसको " फोटोटाइप - 1 (PHOTOTYPE-1) " नाम दिया गया है। और उसको बढ़ने के लिए 18 चोरस इंच छोटीसी चैम्बर काफी होती है। जिसमे 2 इंच (INCH) में  जड़ें और सिर्फ 16 इंच (INCH) में वह छोड़  बड़ा होगा। उसकी चैम्बर के साथ जुड़े हुए 180 सेन्सर उसके उष्णतापमान , ऑक्सीजन का प्रमाण , भेज का प्रमाण इत्यादि  की माहिती देते रहेंगे।    
                                                                        
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Tuesday, 7 March 2017

चीन का 10,000 फ़ीट निचे विशाल समुद्री LAB का प्लानिंग

चीन दक्षिण चीनी सागर की सतह से 3000 मीटर (10,000 FEET) निचे विशाल समुद्री प्रयोगशाला बनाने की योजना कर रहा है। यह परियोजना चिन की  तेरहवीं पंच वर्षीय आर्थिक योजना (PLANNING)  है , और यह देश की  100 विज्ञान और टेक्नोलॉजी की योजनाओ में  2 नंबर की प्राथमिकता  वाली योजना है। इस परियोजना का उद्देश्य पानी मे से  खनिजो को खोजने मे चीन की मदद करना है। ..... लेकिन इसमे सैन्य प्रयोजन भी हो सकती है।....... 

चीन का फ्लैग 

                                                                 लेकिन , अभि तो इस पल लोगो के लिये थोड़ी ही जानकारी उपलब्ध है। 


                                                                         चीन के विज्ञान और टेक्नोलॉजी  मंत्रालय  द्वारा हाल में दी गयी प्रस्तुति(PRESENTATION) में बताया गया हे की  यह  क्षेत्र आगे बढ़ाने लायक होगा। चीन जहाज निर्माण  उद्योग  द्वारा गहरे समुद्र स्टेशन का नेतृत्व किया जाता है। इस बोर्ड पर एक दरजन चालक दल होगा जोकि लगभग एक महीने के लिए पानी के निचे रहेगा। 


समुद्र में एक छोटी प्रयोगशाला को देखा जा सकता है। 

                                                                           तो.. , यह कैसे सम्भव है ? खैर , सामान्य स्थान पे भूगर्भीय और तकनीकी  चुनोतियो का सामना करना पड़ता है , जैसे की टायफूनो (TYPHOONS) की लगातार घटना। इस क्षेत्र में लगभग 125 बिलियन बैरल तेल और लगभग 500 खरब  घन फुट प्राकृतिक गैस का अनुमान किया जाता है। चीन में पहले ही 2015 में अनुसंधान और विकास पर 1.42 ट्रिल्लिअन यूआन ($216 बिलियन ) खर्च किया था। इसलिए वे परियोजना में बड़ा निवेश कर रहे  है। 

समुद्र में एक छोटी प्रयोगशाला को देखा जा सकता है। 


                                                                                 विशेष रूप से , चीन ने पहलेभी यह साबित कर  दिया था कि जब उन्होंने अपने सबमरीन  जिआओलोंग (JIAOLONG)  को 7 किलोमीटर (23,000 FOOT) हिन्द महासागर में उतरने के लिये भेजा था , और एक  वर्ल्ड रिकॉर्ड स्थापित किया था जिससे उनकी गहरी महत्वकांक्षा को जाना जा सकता है। 

                                                                                          और सबसे दिलचस्ब बात यह हे की अमरीका और  रुसी  सबमरीन्स  को ढूंढने  में मदद करने वाले एक नेटवर्क " अंडरवॉटर  ग्रेट वॉल प्रोजेक्ट  (UNDERWATER GREAT WALL) " को भी प्रस्तावित किया गया है।       

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Monday, 6 March 2017

रक्तस्राव के जीवनभर में से अंत के लिए विज्ञानियो ने खोजा नया तरीका

अत्याधिक रक्तस्राव जठरांत्र और तंत्रिका सम्बंधित रोग और  गंभीर चोट के दौरान एक जटिल खतरा है। जठरांत्र रक्तस्राव को बन्ध करने की एक पद्धति में धातु के कॉइल (COIL )  का उपयोग होता हे। यह ज्यादा समस्यारूप हे जिनका  (ब्लड थीँनिंग) -पतला खून हे   या  खून  जमता  नहीं है। और  मरीज के लिए भी रक्तस्राव आवर्तन खतरनाक साबित हो सकता है। 

" हैड्रोजेल  (HYDROGEL) " को  इमेज में दिखाया गया है 

                                                                           सामग्री विज्ञान (MATERIAL  SCIENCE) और दवा (MADICINE )  में , ब्रिघम (BRIGHAM)  के  बायोइंजिनीर्स (BIOENGINEERS)  महिला अस्पताल ने इंजेक्टीबल (INJECTABLE)  बायोमैटेरिअल (BIOMATERIAL)  को विकसित किया हे की  जो  खून की नलिका में उसके आकार  को ढाल कर रक्तस्त्राव को रोक  सकता हे , खुन को  बहने से  रोक के। और इसका विवरण " SCIENCE TRANSLATIONAL  MEDICINE " में प्रकाशित किया गया है। 

जठरांत्र रक्तस्राव  पे हैड्रोजेल का इफ़ेक्ट दिखया गया हे इस इमेज मे 

                                                                               और यह मटेरियल " हैड्रोजेल  (HYDROGEL) " है। और वह '' SHEAR -THINNING  BIOMATERIAL  " - (STB)   के नाम से भी जाना जाता हे। और यह ""टूथपेस्ट -दंतमंजन"" के जैसा होता है। यह जिलेटिन (GELATIN) और नैनोमटेरिअल्स (NANOMATERIALS) से बना  है। चूहों और सुवरो पे किये गये परीक्षणो में  शंशोधकोने दिखा दिया हे की  इन्जेक्ट (INJECT)  किया हुआ "SHEAR -THINNING  BIOMATERIAL - STB" ब्लड प्रेसर का अच्छी तरह सामना करता हे , रक्तस्राव के दौरान।  और तो और  हैड्रोजेल  ब्लड सेल्स (BLOOD CELLS)  को  रक्तस्राव को रोकने के लिये प्रोत्साहित करता हे , जहा  इंजेक्शन दिया गया था वहाँपर।   
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Sunday, 5 March 2017

facebook का आर्टिफीसियल इंटेलिजेन्स अब आत्मघाती व्यहवारकी पहचान करेगा

फेसबुक (फेसबुक) हर रोज अपने 1. 86 मिलयन  यूजर के लिए  कोई न कोई  नए अपडेट लाता रहता हे। फेसबुक की इन्ही सुविधा में  लाइव स्ट्रीम , चेट ,फोन कॉल इत्यादि का समावेश किया जाता हे। आखिर में जो लाइव स्ट्रीम वाली अपडेट फेसबुक ने दी थी उससे एक कमनसीबी वाली बात सामने आई  हे की   ''आत्महत्या '' का भी लाइव स्ट्रीम लोग अब  इसी  प्लेटफार्म पर से करते  है। 


                                                                                      तो  इसी को लेकर फेसबुक  ने अपने अल्गोरिधम् में एसी दुखद घटनाओ को होने से पहले रोकने केलिए ''पैटर्न रेकॉग्नाइज़िंग अल्गोरिधम (pattern recognizing algorithm )'' को विकसित करने का काम   किया  हे। यह 'पैटर्न रेकॉग्नाइज़िंग अल्गोरिधम (pattern recognizing algorithm )''  ऐसी दुःखद घटनाओ के चिन्हों को पहलेसे ही जाँच लेगा जिससे ऐसी  दुखद घटनाओ को रोका जा सके। 

मार्क जुकरबर्ग को देखा जा सकता हे जो ARTIFICIAL INTELLIGENCE के बारे में समजा रहे है। 


                                                                                   जबकि यह प्रणाली पूरी दुनियाभर में चल रही हे , लेकिन फेसबुक  मैसेन्जर के जरिये  ऐसे संकट समय की हेल्पलाइन  का विकल्प  सिर्फ अमरीका में उपलब्ध है। फेसबुक के प्रोडक्ट मेनेजर ने bbc न्यूज़ से बात की थी की  वे  फेसबुक पर मित्रो के सम्बन्ध या किसी और जानकारी पे  प्रभाव नहीं करेगा लेकिन अगर कोई फेसबुक के ग्रुप में  मित्रो के बिच हो रहे  आत्मधाती या एकदम  आक्रामक व्यवहार को परखेगा और  तुरंत ही  प्रतिक्रिया करेगा।



                                               अकेले US में हर 13 मिनट में 1 आत्महत्या होती हे। और यह देश का 10 वा  सबसे बड़ा मृत्यु का कारण है।   जबकि FACEBOOK अभीभी नया हे , यह देखने की बात हे की , SOCIAL मीडिया कंपनी  अपने इस मुश्किल आंकड़ो को जोड़ के  अपने  यूजर्स की  रक्षा करने केलिए समर्पित  है।  
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फेमस ''SCIENCE THEORIES'' जो गलत साबित हुई हे -PART 3

ब्रम्हांड रहस्यमय पदार्थ  '' ईथर '' से भरा हुआ है : एकदम गलत !!

                                                        
                                                                           विज्ञानियो ने अपने  अनुभव से बताया था की तरंगो को फैलने  के लिए किसी न कीसी माध्यम की जरूरत होती है। आवाज या ध्वनि माध्यम की  अनुपस्थति (absence) यानि की  ''शुन्यावकाश'' में  फैल नहीं सकते। ग्रीक लोगों को लगता था की , ब्रम्हांड में प्रकाश को फैलने के लिए माध्यम की जरूरत होती है। और यह माध्यम यानिकि ''अद्र्श्य ''  पर ''प्रकाश (light)'' को प्रकाशित करने वाला माध्यम  ''ईथर (ether)'' !! द्रश्यमान  दुनिया को देखने के लिए प्रकाश अनिवार्य है। 

ब्रम्हांड  


                                                19 वि शताब्दी तक यह मान्यता को '' यूनिवर्सल ट्रुथ  (universal truth) '' या सनातन सत्य के तौर पे लोगो ने स्वीकार किया था। ब्रम्हांड की खाली जगह की जहा  कुछ भी नहीं  था वहाँ भी विज्ञानियो ने  ''ईथर (ether)'' की उपस्थिति  की  कल्पना की थी। प्रकाश के वक्रीभवन और व्यतिकरण के प्रयोगो के आधार पर  आधुनिक विज्ञान ने  ''ईथर (ether)''  की थ्योरी  को  गलत साबित किया  था। 

अल्बर्ट  आइन्स्टाइन  


                                                                                        और उसको कबर में दाल ने का  काम  आइन्स्टाइन  ने किया था। उन्होंने सापेक्षवाद  दिया था और भौतिक विज्ञान की दुनिया को फिर से  ठीक  कर दिया था।   ''ईथर (ether)'' की संकल्पना  को पुरे तौर पे मुक्ति मिल गयी थी। , परंतु आधुनिक विज्ञान  कुदरत के बलो के पीछे विशिष्ठ प्रकार के कण और विशिष्ठ प्रकार के माध्यम यानिके ''फिल्ड (field)" के सिद्धान्तों का आज भी स्वीकार  कर रहा है।     

टाइम और स्पेस  को कैसे फेब्रिक के तोर पे लिया जाता हे  वो  तस्वीर में देखा जा सकता हे 


                                                                                                      स्पेस और टाइम के लिए अब ''फेब्रिक (febric)'' शब्द  का उपयोग किया जाता है। ''ईथर (ether)'' आज भौतिक विज्ञान की  टैक्सबुक में से गायब हो गया  है। 
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Saturday, 4 March 2017

फेमस ''SCIENCE THEORIES'' जो गलत साबित हुई हे -PART 2

आइन्स्टाइन  का ''स्टेटिक यूनिवर्स '' :-

                                                                                         विज्ञानिओ  ने  ''बिग गैंग'' थ्योरी का स्वीकार किया , उससे पहले ऐसी मान्यता थी की ''ब्रम्हांड का कद नही बदलता ब्रम्हांड अचल है '' ब्रम्हांड की यह   विभावना  का ''स्टेटिक यूनिवर्स '' के तोर पे स्वीकार किया गया था। जेसमे  आइनस्टाइन  जैसे सदी के महा नायको  का भी  समावेश होता है। स्टेटिक यूनिवर्स  की एक लाक्षणिकता यह थी की ब्रम्हांड का  कुल वोल्युम तय  ही था। उसमे कोई  बदलाव का कोई अवकाश नही था। और सरल भाषा में कहे तो यूनिवर्स एक क्लोज्ड (बंध)  सिस्टम थी। 

अल्बर्ट  आइनस्टाइन  

                                                                     इस थ्योरी की सबसे बड़े विड़म्बना तो  यह थी की   आइनस्टाइन इस प्रकार की थ्योरी का  स्वीकार  कर अपनी  ''थ्योरी ऑफ़ जनरल रिलेटिविटी ''  को दिया था। जिसमे खुदकी गिनतियों के अनरूप मिलने वाले तारणो  के साथ  तुलना के लिए अल्बर्ट  आइनस्टाइन ने ''कॉस्मोलॉजिकल  कॉन्स्टेन्ट '' का सिद्धांत दिया था। ब्रम्हांड में सिर्फ गुरुत्वाकर्षण  बल ही लगता  होता तो , ब्रम्हांड का  संकोचन हो जाना चाहिए। जिसको ''कॉस्मोलॉजिकल  कॉन्स्टेन्ट'' देकर आइनस्टाइन ने  स्टेटिक बना दिया। अमरीकन खगोल विज्ञानी एडविन हबल ने उस वक्त ''निहारिका'' के तौर पे स्वीकार किया हुआ ब्रम्हांड की रचना की ''रेड शिफ्ट '' पैटर्न  आइनस्टाइन को दिखा कर  कहा की ''ब्रम्हांड का विस्तरण हो रहा हे '' फिर भी आइनस्टाइन अपनी बात पे डटे रहे थे। 

आइनस्टाइन इमेज में दिख रहे हे  कॉस्मोलोजिकल कॉन्स्टेन्ट के साथ 

                                                                     1922 में रशियन विज्ञानी अलेक्ज़ेंडर फाइड़सा ने कहा था की ''आइनस्टाइन के समीकरण गतिशील ब्रम्हांड को  लागु कर सकते हे '' 1927 में बेल्जियम के एक खगोल विज्ञानी ने खगोल विद्या के अवलोकनको और सापेक्षवाद  के सिद्धान्त  को लागु किया और साबित कर दिया के '' ब्रम्हांड का विस्तरण हो रहा हे ''.... फिर  आइनस्टाइन ने स्वीकार किया की उनकी गलती हुई  है। 
                                                                           
आइनस्टाइन को हबल के साथ देखा जा सकता हे  आइनस्टाइन टेलिस्कोप  में देख  रहे हे  और जो हाथ में सिगार पकड़े हुए हे वह हबल हे 

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विश्व के सबसे बड़े पक्षी की पंखोंका फैलाव 24 फुट था !!

पेलागोर्निस सान्द्रेसी नामक उस पक्षी का वजन 80 kg  भी ज्यादा था !! पेलागोर्निस सान्द्रेसी                                       ...